मध्य-पूर्व में जारी युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतें 16% बढने और विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से करीब ₹18,200 करोड़ की बिकवाली से रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर 92.10 तक गिर गया था। स्थिति को काबू में करने के लिए Reserve Bank of India ने ₹1.08 लाख करोड़ बाजार में झोंके, जिसके बाद रुपया सुधरकर 91.10 पर आ गया। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फिलहाल $723 अरब से ज्यादा है, जो RBI को ऐसे संकट में मजबूती से खड़े रहने की ताकत देता है।पेंट, केमिकल्स और विमानन जैसे तेल आयात पर निर्भर क्षेत्रों पर दबाव बढ़ेगा, जबकि IT और निर्यात कंपनियों के लिए कमज़ोर रुपया एक अच्छा मौका साबित हो सकता है।




