NSE के शेयर 24 सितंबर 2026 को BSE पर ₹1,800 के भाव पर list हुए। कोई exchange अपने ही platform पर list नहीं हो सकता, इसलिए NSE की listing BSE पर हुई।
NSE और BSE वे बाज़ार हैं जहां शेयर की खरीद-बिक्री होती है। Exchange बदलने से शेयर नहीं बदलता, अंतर liquidity और charges में आता है।
📌 संक्षेप में
- दोनों SEBI के नियमों के तहत चलते हैं; trading का समय (9:15 से 3:30) और T+1 settlement भी समान हैं।
- BSE (1875) पर ज़्यादा कंपनियां listed हैं, NSE (1992) पर सौदे कहीं ज़्यादा होते हैं।
- FY26 में cash market turnover का करीब 93% हिस्सा NSE पर रहा।
- Charges में अंतर मामूली है; लागत पर ज़्यादा असर spread का होता है।
| पैमाना | NSE | BSE |
|---|---|---|
| स्थापना | 1992 (cash trading नवंबर 1994 से) | 1875 (एशिया का सबसे पुराना) |
| Flagship index | Nifty 50 (50 शेयर) | Sensex (30 शेयर) |
| Listed कंपनियां (मार्च 2026) | 2,978 | 5,955 |
| कुल market cap (मार्च 2026) | ₹411.3 लाख करोड़ | ₹411.6 लाख करोड़ |
| Cash market share (FY26) | 92.99% | लगभग 7% |
| Options premium share (FY26) | 74.71% | लगभग 25% |
| Cash transaction charge | ₹307 प्रति करोड़ | ₹375 प्रति करोड़ (Group A/B) |
NSE और BSE का इतिहास (NSE aur BSE me kya fark hai)
BSE की शुरुआत 1875 में मुंबई के शेयर दलालों ने की थी। NSE 1992 में बना और 1994 से पूरी तरह electronic trading शुरू की।
Nifty 50 और Sensex में अंतर (Nifty aur Sensex me antar)
Sensex की base value 100 (1978-79) है और Nifty 50 की 1000 (3 नवंबर 1995)। Base value और कंपनियां अलग होने से दोनों के अंक कभी बराबर नहीं होते।
24 सितंबर 2026 को Nifty 23,063.10 और Sensex 73,580.54 पर बंद हुए, पर गिरावट दोनों में 1.6-1.7% के आसपास थी। इसलिए तुलना प्रतिशत बदलाव से की जाती है।
NSE और BSE का market share (NSE vs BSE market share 2026)

FY26 में cash market के ₹280.26 लाख करोड़ turnover में से ₹260.63 लाख करोड़ NSE पर हुआ। Equity futures में NSE का हिस्सा 99.79% रहा।
Options में premium turnover का करीब एक-चौथाई हिस्सा BSE के Sensex और Bankex options का रहा। Nifty options केवल NSE पर और Sensex options केवल BSE पर मिलते हैं।
NSE & BSE में Trade करने पर क्या फर्क पड़ता है
Trading का समय और T+1 settlement दोनों पर एक है, इसलिए BSE पर बेचने से पैसा जल्दी नहीं आता।
असल अंतर liquidity का है। बड़े शेयरों में भाव लगभग बराबर रहता है, पर छोटी कंपनियों में BSE पर सौदे कम होने से spread 1% से 2% तक हो सकता है। ₹1 लाख पर 1% का मतलब ₹1,000 है।
दोनों पर एक ही demat से trading होती है और शेयर एक ही ISIN के तहत जमा होता है।

💰 ₹ का उदाहरण: charges में कितना अंतर
NSE ₹307 और BSE (Group A/B) ₹375 प्रति करोड़ लेता है, ऊपर से 18% GST।
- ₹1 लाख के सौदे पर NSE ₹3.07 और BSE ₹3.75। अंतर 68 पैसे, GST जोड़कर करीब 80 पैसे।
- ₹6 करोड़ सालाना turnover पर अंतर करीब ₹481 (GST समेत)।
- उसी turnover पर 0.05% ज़्यादा spread की लागत ₹30,000 बनती है, जो charges के अंतर का 60 गुना है।
✅ ध्यान दें
बड़ा order देने से पहले दोनों exchanges की market depth देख लें। छोटी कंपनियों में limit order लगाएं।
⚠️ सावधानी
कम liquidity वाले शेयर में market order कई भाव पर पूरा होता है। इंदौर के राहुल ने एक छोटी कंपनी के 200 शेयर BSE पर market order से लिए। आखिरी भाव ₹142 था, average ₹145.20 पड़ा और ₹640 ज़्यादा लगे। SME शेयर सिर्फ़ एक exchange पर होते हैं, उनमें lot बड़ा और खरीदार कम होते हैं।
फायदे और नुकसान (NSE - BSE ke fayde aur nuksan)
✅ फायदे
- एक demat से दोनों exchange पर trading।
- बड़े शेयरों में भाव लगभग बराबर।
- दो exchange की प्रतिस्पर्धा से charges और technology में निवेशक को लाभ।
❌ नुकसान
- केवल BSE पर listed छोटी कंपनियों में बहुत कम सौदे।
- Opening price दोनों पर अलग हो सकता है।
- F&O position एक exchange से दूसरे पर नहीं कटती।
NSE और BSE पर quiz (NSE - BSE quiz)
उत्तर देखने के लिए प्रश्न पर क्लिक करें।
प्रश्न 1: क्या NSE पर delivery में खरीदा गया शेयर BSE पर बेचा जा सकता है?
हाँ। Delivery मिलने के बाद वही शेयर एक ही demat और ISIN पर BSE पर भी बेचा जा सकता है।
प्रश्न 2: Sensex 73 हज़ार और Nifty 23 हज़ार पर है, तो क्या Sensex बड़ा index है?
नहीं। Sensex और Nifty की base value अलग है, इसलिए ज्यादा अंक का मतलब बड़ा index नहीं। तुलना प्रतिशत बदलाव से होती है।
प्रश्न 3: किस exchange पर settlement जल्दी होता है?
किसी पर भी जल्दी नहीं। NSE और BSE दोनों पर settlement T+1 है।
Updated: सितंबर 2026